FUNDAMENTAL RIGHTS in Hindi [हमारे मौलिक अधिकार की सम्पूर्ण जानकारी] PDF

FUNDAMENTAL RIGHTS in Hindi

FUNDAMENTAL RIGHTS IN HINDI

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भारत के,
सविधान में मौलिक अधिकार
भारत का सविधान एक लिखित दस्तावेज है ,इसीलिए हर एक कानून,प्रावधान और अधिकार को लिखा गया है ,सुविधा के लिहाज से भारत के सविधान को २२ भागो में वहीभाजित किया गया .१२ से ३५ तक मौलिक अधिकार का वर्णन किया गया है .
हमारे सविधान में इन अधिकारों को अमेरिका के सविधान से लिया गया है ,हमारी सविधान सभा के द्वारा 60 देशों के सविधानो का प्रारूप देखा गया और हर प्रकार के प्रारूपों को कानूनों को भारत के नागरिको के अनुसार अपनाया गया .
हमारे देश में कुछ राइट सभी को अर्थात विदेशी और नागरिको ,कुछ अधिकार केवल भारत के नागरिको को ही दिए गए है :
जैसे ,सरकार की आलोचना ,जनांदोलन ,कहि भी बसने का राइट ,आरक्षण इत्यादि अधिकार केवल भारत के नागरिको को ही है .

कुछ अधिकार सभी को दिए गए है ,जैसे कानून के समुख समानता ,शोषण के अधिकार ,धरम का इत्यादि .
अगर पूछा जाय की सविधान की आत्मा किस भाग को माना जाय तो सहज भाव से हम कहे सकते है की ,वोभाग ३ है जिसमे हर नागरिक को मौलिक अधिकार दिए गए है .
इन अधिकारों को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा सुरक्षित किया गया है ,अगर सरकार या कोई नागरिक इनको नुकसान पहुँचाय तो पीड़ित न्यायलय जा सकता है .कोर्ट के साथ इन अधिकारों को सविधान भी गारंटी देता है किसी भी स्तिथि मै मौलिक अधिकारों को छीना नहीं जा सकता केवल युद्ध ,बाहरी सेना द्वारा हमले ,या देश मै सस्त्र विद्रोह के समय इनको कम किया जा सकता है और जैसे ही शांति हो जाय इन्हे वापस लागु कर दिया जाय .

तो आओ कुछ जानकारी ली जाय अधिकारों के बारे मै ;
26 नवम्बर 1949 को हमारा सविधान बन कर त्यार हो गया था .और हमको 7 मौलिक अधिकार दिए गए वर्तमान में लोगो को ६ मौलिक अधिकार है ,7 वे अधिकार सम्पति के अधिकार को 44TH कोंस्टीटूशनल अमेंडमेंट के द्वारा समापत कर दिया गया .
1 विधि के सामने सभी सामान
2 स्वतंत्रता का अधिकार
3 शोषण के विरुद्ध अधिकार
4 धार्मिक स्वतंत्र का अधिकार
5 शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार
6 सवैधानिक उपचारो का अधिकार

ये 6 अधिकार हमको हमारा सविधान देता है ,और इनका हनन होने पर हर नागरिक हाई कोर्ट आर्टिकल 226 एवं आर्टिक्ल ३२ के तहत सुप्रीम कोर्ट जा सकते है .

मौलिक अधिकार को कम करने या ख़तम करने की सकती केवल संसद के पास है ,न की राज्य के पास .
और संसद भी बहुमत के आधार पर ही कर सकती है साधारण बिल से नहीं ये साधारण अधिकार नहीं है ये सविधान द्वारा दिए गए है .
और अगर संसद मनमानी करती है तो सर्वोचय न्यायालय इसमें अपनी राय रख सकता है ,सविधान सुप्रीम कोर्ट को ये शक्ति देता है की वो इन अधिकारों की रक्षा करे .
इन सभी अधिकारों में सबसे महत्वपूर्ण अधिकार ; कोर्ट जाने का अधिकार है जो की आर्टिकल ३२ है इसिलय डॉ.भीम राव अम्बेडकर जी ने इस आर्टिकल को सविधान की आत्मा कहा है .अगर ये अधिकार नहीं होता तो सब अधिकार बेकार हो जाते . जब तक हमको कोई सुरक्षा लिखित में न हो तब तक उसका कोई महत्व नहीं है .

भारत का सविधान हम नागरिको वो सब अधिकार देता है ,जो हमारे लिए जरुरी है .और समय के अनुसार हमको सविधान और भी राइट दे सकता है जो तत्काल जरुरी होंगे .भारत का सविधान इस बात की पूरी गुंजाइश रखता है आर्टिक्ल 35 के तहत संसद को ये अधिकार है .
इस भाग तीन को अधिकारों का मैग्नाकार्टा भी कहते है ये 1213 के अधिकार पत्र से प्रभावित है इस समय पश्मी देशो में कुछ अधिकार वहां की जनता को दिए गए थे.

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Author: NCERTADMIN

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